आजादी
हर चीज के होते हैं दो पहलु, अब क्या मै यही बात आजादी के माध्यम से केहलू? बच्चो को मिली फोन चलाने की आज़ादी, कुछ ने की समय की बरबादी, तो कुछ ने कमाए पैसे और बड़ाई इंप्लॉयड आबादी। लोग कहते भारत हुआ आज़ाद फिर भी रोज़ाना बॉर्डर पे होती हज़ारो ज़िंदगी बरबाद. हिंदू मुस्लिम सब है भाई तो फिर हमारे बॉर्डर से चीखें क्यों आई? जब कोई नेता आज़ादी पर विशेष टिपडी कर जाते हैं, मेरे भारत के लोग मौन क्यों दिखलाते हैं महात्मा गांधी भगत सिंह के नारे हम लगाते है परन्तु क्या सच में उस क़ुरबानी की इज़्ज़त कर पाते है? जो चाहे वो पहनते हो न जो मन मे आये करते हो न जो चाहे वो बोलकर भी तुम क्यूँ सोशल मीडिया की दुनिया मई हो गये गुम्म? इंस्टा फेसबुक स्नैपचैट को आज़ादी हम कहते नहीं क्या बोले इस जनरेशन को जो सो गयी है जाके कहीं? जहाँ तिरंगे को पूजते है वहीँ आज़ादी को झुठलाते हैं ऐसी सोच हम कहाँ से लाते हैं फॉरेन एंथम पे वाइब करते करते जन गण मन से कतराते हैं ये कैसी सोच है और लोग कहाँ से लाते है सच को झुटलाकर झूठ को गले लगाते हैं? चलो सुनो एक कथा पुरानी पिंजरे मे कैद थी चिड़िया रानी आ...